मीठी बातें कैसे गुस्से को खत्म कर देती हैं? Praise Priming Effect की सच्चाई

 

गुस्से में सामना करने जा रहा व्यक्ति और सामने वाले की मीठी बातों से शांत होता हुआ दृश्य

आज हम तो घर से निकले थे गुस्से में कि आज उसका हिसाब-किताब करके ही रहेंगे। लेकिन जब हम उसके पास गए, तो न जाने उसने ऐसा क्या किया कि हम उसकी बातों में इस कदर खो गए कि हमें याद ही नहीं रहा कि आज फैसला करना था।


कई बार हमारे साथ ऐसा होता है। हम गुस्से में होते हैं, लेकिन सामने वाला इंसान अपनी मीठी बातों से हमारा पूरा मूड बदल देता है। आखिर ऐसा क्यों होता है?

जब गुस्सा अचानक खत्म हो जाता है

मान लो तुम घर से यह सोचकर निकले कि आज उस इंसान से हिसाब-किताब करके ही वापस आओगे।

लेकिन जैसे ही तुम उसके सामने गए, वह इंसान शांत होकर तुमसे बात करने लगा। उसने मीठे शब्दों का इस्तेमाल किया, तुम्हारी तारीफ की और तुम्हें अच्छा महसूस करवाया।

दो लोगों की बातचीत जिसमें गुस्सा धीरे-धीरे भावनात्मक रूप से शांत हो रहा है

धीरे-धीरे तुम्हारा गुस्सा कम होने लगा और तुम भूल गए कि तुम किस वजह से वहाँ आए थे।

ऐसा सिर्फ तुम्हारे साथ नहीं होता, बल्कि बहुत लोगों के साथ होता है।

इसके पीछे की Psychology क्या है?

मानव मस्तिष्क और भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता मनोविज्ञान चित्र

Psychology में इसे Praise Priming Effect कहा जाता है।


इसे आसान भाषा में समझो।

अगर कोई इंसान बार-बार तुम्हारी तारीफ करता है, तुम्हें अच्छा महसूस करवाता है या तुम्हें खुश रखने की कोशिश करता है, तो दिमाग में सकारात्मक प्रतिक्रिया बनने लगती है।

हमारा दिमाग उस इंसान को खतरे की जगह आराम और अपनापन से जोड़ने लगता है।

दिमाग में क्या होता है?

जब कोई इंसान हमारी तारीफ करता है, हमें महत्व देता है या अच्छा महसूस करवाता है, तो दिमाग में वही तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया बनने लगती है जैसी लोग आपस में मिलने, अपनापन महसूस करने या भावनात्मक जुड़ाव के समय महसूस करते हैं।


इसी वजह से कई बार ऐसा होता है:

• हम बार-बार गुस्सा करते हैं

• सामने वाला बार-बार तारीफ करता है

• और हम फिर से पिघल जाते हैं


यही वजह है कि कुछ लोग सिर्फ अपने व्यवहार से माहौल बदल देते हैं।

• लेकिन यहाँ सावधान रहना जरूरी है

• हर इंसान ऐसा अच्छे इरादे से नहीं करता।

• कुछ लोग आपकी भावनाओं को समझकर उनका गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

अगर आपको अपने मन को मजबूत बनाना है, भावनाओं पर नियंत्रण रखना है और लोगों को बेहतर तरीके से समझना है, तो हमेशा सोच-समझकर फैसले लें।

मीठी बातें हमेशा गलत नहीं होतीं, लेकिन हर तारीफ सच्ची हो ऐसा भी जरूरी नहीं है।

इसलिए भावनाओं के साथ-साथ समझदारी भी जरूरी है। जब आप अपने मन को नियंत्रित करना सीख जाते हैं

, तब दूसरों के प्रभाव में कम आते हैं।

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